जब भी भारतीय भोजन की बात होती है तो हमारे दिमाग में सबसे पहले वही व्यंजन आते हैं जिनके नाम हम बचपन से सुनते आए हैं। किसी को दाल-बाटी याद आती है, किसी को सरसों का साग, किसी को इडली-डोसा और किसी को लिट्टी-चोखा। लेकिन भारत के खाने की कहानी केवल उन व्यंजनों तक सीमित नहीं है जिन्हें आज restaurants, food blogs और social media पर बार-बार देखा जाता है लेकिन क्या यही सब भारत का असली परम्परिक खाना है
हम मानते है की इतने बड़े और अत्यधिक आबादी वाले हमारे इस प्यारे से देश भारत में खान पान को लेकर काफी विविधता देखने को मिलती हैं लेकिन आज के समय में इंटरनेट के बदलते दौर में लोगों को भारत के हर इलाके के खान पान को लेकर के जो जानकारी है वो तेज़ी से फ़ैल रही है जिस कारन आज आप भारत के किसी भी इलाके में जा करके किसी भी दूसरे इलाके में बनने वाली डिशेस का आनद ले सकते है लेकिन आज के समय में एक बात और तेज़ी से प्रचलित हो रही है और वो है की आज के मिलावट और बढ़ते प्रदूषण के दौर में लोग अपने स्वास्थ को लेकर के पहले से काफी अधिक सजक हो गए है ऐसी स्थिति में लोग अपने पुराने ज़माने की लाइफ स्टाइल की और लौट रही और अपने पुराने ज़माने के खान पान की और तेज़ी से लौटा रहे है जिन्हे खा करके हमारी पूर्वज कई सौ साल की ज़िन्दगी जीते थे
भारत के लगभग हर हिस्से में ऐसी भी एक रसोई रही है जिसके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं। गांवों में दादी-नानी और घर के बुजुर्ग मौसम देखकर पत्तों, फूलों, तनों, जड़ों, स्थानीय अनाजों, दालों और जंगल से मिलने वाली चीजों से ऐसे व्यंजन बनाया करते थे जिनके नाम तक आज की पीढ़ी के बहुत से लोगों ने शायद पहली बार सुने हों। यही वजह है कि सुरन की साधारण सी सब्जी, केले के तने से बनी सब्जी, कंडाली का साग, महुआ से बने पकवान या किसी स्थानीय अनाज की पुरानी खिचड़ी केवल खाने की चीजें नहीं हैं; इनके पीछे एक पूरा जीवन और स्थानीय ज्ञान छिपा हुआ है।
समस्या यह है कि हमारी रसोई भी समय के साथ बदल रही है। शहरों की तेज जिंदगी, बदलती खेती, बाजार में उपलब्ध ingredients, packaged food और खाना बनाने के लिए कम मिलता समय—इन सबने पारंपरिक भोजन की आदतों को प्रभावित किया है। कई recipes आज भी मौजूद हैं, लेकिन वे रोजमर्रा की रसोई से निकलकर केवल किसी खास मौसम, त्योहार, गांव या परिवार तक सीमित हो गई हैं।
हमारे आज के इस लेख में हम आपको भारत के विब्भिन इलाकों में बनने वाले उन खास व्यंजनों की चर्चा करेंगे जिनका कि नाम शायद आपने बमुश्किल ही सुना हो जो न सिर्फ स्वाद में ला जवाब है बल्कि आपकी सेहत के लिए भी काफी लाभकारी है तो चलिए आज का अपना लेख शुरू करते है।
हमारी पुरानी रसोई में ऐसा क्या खास था?
पुरानी भारतीय रसोई की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि वह केवल बाजार पर निर्भर नहीं थी। घर के आसपास खेत में क्या उगा है, जंगल से मौसम में क्या मिल रहा है, कौन-सा पत्ता खाने योग्य है, कौन-सा अनाज स्थानीय मिट्टी में अच्छी तरह पैदा होता है और किस चीज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है—इन सबका सीधा संबंध भोजन से था।
इसी कारण भारत में एक ही ingredient के कई अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं। किसी जगह केले का फल पकाया गया तो किसी जगह उसके तने का इस्तेमाल हुआ। कहीं कद्दू के फल के साथ उसके फूल भी पकाए गए और कहीं सहजन की फलियों के साथ उसके पत्ते और फूल भी रसोई में पहुंचे।
आज हमें इनमें से कई चीजें unusual लग सकती हैं, लेकिन उस समय ये स्थानीय जीवन का सामान्य हिस्सा थीं।
| # | पारंपरिक व्यंजन | Recipe Video | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| 1 | सुरन की सब्जी | वीडियो देखें | उत्तर प्रदेश / बिहार / मध्य भारत |
| 2 | केले के तने की सब्जी | वीडियो देखें | दक्षिण भारत / पूर्वी भारत |
| 3 | कमल ककड़ी की सब्जी | वीडियो देखें | उत्तर भारत |
| 4 | कमल ककड़ी के कोफ्ते | वीडियो देखें | उत्तर भारत |
| 5 | कंडाली का साग | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 6 | भट्ट की चुड़कानी | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 7 | फाणू | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 8 | चैंसू | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 9 | गहत की दाल | वीडियो देखें | उत्तराखंड / हिमालयी क्षेत्र |
| 10 | झंगोरे की खीर | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 11 | मंडुए की रोटी | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 12 | काफली | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 13 | आलू के गुटके | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 14 | थिचौणी | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 15 | बाड़ी | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 16 | गुच्छी की सब्जी | वीडियो देखें | हिमालयी क्षेत्र / हिमाचल प्रदेश |
| 17 | कुट्टू की रोटी | वीडियो देखें | हिमालयी क्षेत्र / उत्तर भारत |
| 18 | फापर की रोटी | वीडियो देखें | उत्तराखंड / हिमालयी क्षेत्र |
| 19 | बथुए का साग | वीडियो देखें | उत्तर भारत |
| 20 | बथुए की कढ़ी | वीडियो देखें | उत्तर भारत |
| 21 | अरबी के पत्तों की सब्जी | वीडियो देखें | उत्तर / पश्चिम / मध्य भारत |
| 22 | अरबी के पत्तों के पकौड़े | वीडियो देखें | महाराष्ट्र / गुजरात / उत्तर भारत |
| 23 | कद्दू के फूल की सब्जी | वीडियो देखें | पूर्वी / उत्तर भारत |
| 24 | कद्दू के फूल के पकौड़े | वीडियो देखें | पूर्वी / उत्तर भारत |
| 25 | सहजन के फूल की सब्जी | वीडियो देखें | दक्षिण / पूर्वी भारत |
| 26 | सहजन के पत्तों का साग | वीडियो देखें | दक्षिण / मध्य / पूर्वी भारत |
| 27 | महुआ के लड्डू | वीडियो देखें | मध्य प्रदेश / छत्तीसगढ़ |
| 28 | महुआ का लाटा | वीडियो देखें | मध्य भारत |
| 29 | कुल्थी की दाल | वीडियो देखें | उत्तर भारत / हिमालय |
| 30 | चना साग | वीडियो देखें | उत्तर भारत |
| 31 | सनई के फूल की सब्जी | वीडियो देखें | बिहार / झारखंड |
| 32 | बूंट की दाल | वीडियो देखें | बुंदेलखंड / मध्य भारत |
| 33 | कुटकी की खिचड़ी | वीडियो देखें | मध्य भारत |
| 34 | कोदो की खिचड़ी | वीडियो देखें | मध्य भारत |
| 35 | सामा की खीर | वीडियो देखें | उत्तर / मध्य भारत |
| 36 | चिरौंजी की दाल | वीडियो देखें | मध्य भारत |
| 37 | बाजरे की खिचड़ी | वीडियो देखें | राजस्थान / पश्चिमी भारत |
| 38 | बाजरे की राब | वीडियो देखें | राजस्थान |
| 39 | कैर की सब्जी | वीडियो देखें | राजस्थान |
| 40 | कुमटिया की सब्जी | वीडियो देखें | राजस्थान |
| 41 | सांगरी की सब्जी | वीडियो देखें | राजस्थान |
| 42 | गोंदली की सब्जी | वीडियो देखें | राजस्थान / पश्चिमी भारत |
| 43 | बाजरे का ढोकला | वीडियो देखें | गुजरात / राजस्थान |
| 44 | ओसामण | वीडियो देखें | गुजरात |
| 45 | मुठिया | वीडियो देखें | गुजरात |
| 46 | अळूची पातळ भाजी | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 47 | अळू वड़ी | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 48 | झुणका | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 49 | पिठलं | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 50 | उकडपेंडी | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 51 | फणसाची भाजी | वीडियो देखें | महाराष्ट्र / कोंकण |
| 52 | घावन | वीडियो देखें | महाराष्ट्र / कोंकण |
| 53 | सोलकढ़ी | वीडियो देखें | कोंकण / महाराष्ट्र / गोवा |
| 54 | तांदळाची भाकरी | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 55 | फोडणीचा भात | वीडियो देखें | महाराष्ट्र |
| 56 | पाखाला भात | वीडियो देखें | ओडिशा |
| 57 | मंडिया जाउ | वीडियो देखें | ओडिशा |
| 58 | थापड़ी रोटी | वीडियो देखें | ओडिशा |
| 59 | एंडी आलू | वीडियो देखें | ओडिशा |
| 60 | बोड़ी चूरा | वीडियो देखें | ओडिशा |
| 61 | काई चटनी | वीडियो देखें | ओडिशा / आदिवासी क्षेत्र |
| 62 | जल उतु | वीडियो देखें | ओडिशा |
| 63 | भेदाइलता | वीडियो देखें | असम |
| 64 | माटिकादुरी | वीडियो देखें | असम |
| 65 | अमिता खार | वीडियो देखें | असम |
| 66 | खोरिसा | वीडियो देखें | असम |
| 67 | पिटिका | वीडियो देखें | असम |
| 68 | मासोर टेंगा | वीडियो देखें | असम |
| 69 | बाँस की कोपलों की सब्जी | वीडियो देखें | पूर्वोत्तर भारत |
| 70 | सोइबुम | वीडियो देखें | मणिपुर |
| 71 | सोइजिन एरोम्बा | वीडियो देखें | मणिपुर |
| 72 | एरोम्बा | वीडियो देखें | मणिपुर |
| 73 | सिंग्जू | वीडियो देखें | मणिपुर |
| 74 | चामथोंग | वीडियो देखें | मणिपुर |
| 75 | बाई | वीडियो देखें | मिजोरम |
| 76 | सावछियार | वीडियो देखें | मिजोरम |
| 77 | जादोह | वीडियो देखें | मेघालय / Khasi क्षेत्र |
| 78 | तुंगरिम्बाई | वीडियो देखें | मेघालय |
| 79 | दोहनीइओंग | वीडियो देखें | मेघालय |
| 80 | किनेमा | वीडियो देखें | सिक्किम / पूर्वोत्तर भारत |
| 81 | कच्चे केले की सब्जी | वीडियो देखें | दक्षिण / पूर्वी भारत |
| 82 | केले के फूल की सब्जी | वीडियो देखें | दक्षिण / पूर्वी भारत |
| 83 | केले के फूल के पकौड़े | वीडियो देखें | पूर्वी / दक्षिण भारत |
| 84 | कमल के बीज की खीर | वीडियो देखें | उत्तर भारत / बिहार |
| 85 | बांस की कोपलों की चटनी | वीडियो देखें | पूर्वोत्तर भारत |
| 86 | बांस की कोपलों का अचार | वीडियो देखें | असम / पूर्वोत्तर भारत |
| 87 | रागी का पारंपरिक पेय | वीडियो देखें | दक्षिण भारत / मध्य भारत |
| 88 | ज्वार की भाकरी | वीडियो देखें | महाराष्ट्र / दक्कन |
| 89 | बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी | वीडियो देखें | राजस्थान / पश्चिमी भारत |
| 90 | मक्का की रोटी | वीडियो देखें | उत्तर भारत |
| 91 | कुटकी की रोटी | वीडियो देखें | मध्य भारत / आदिवासी क्षेत्र |
| 92 | कोदो की रोटी | वीडियो देखें | मध्य भारत |
| 93 | कुल्थी का फाणू | वीडियो देखें | उत्तराखंड |
| 94 | जंगली मशरूम की सब्जी | वीडियो देखें | हिमालयी क्षेत्र |
| 95 | स्थानीय पत्तियों का साग | वीडियो देखें | भारत के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र |
| 96 | जंगली पत्तियों की पारंपरिक सब्जी | वीडियो देखें | भारत के विभिन्न आदिवासी क्षेत्र |
| 97 | Fermented Rice की पारंपरिक तैयारी | वीडियो देखें | ओडिशा / पूर्वोत्तर / पूर्वी भारत |
| 98 | स्थानीय दालों की पारंपरिक दाल | वीडियो देखें | भारत के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्र |
| 99 | मौसमी पारंपरिक साग | वीडियो देखें | भारत के विभिन्न क्षेत्र |
| 100 | दादी-नानी की पारंपरिक घर की रेसिपी | वीडियो देखें | भारत के विभिन्न क्षेत्र |
1. सुरन की सब्जी
सुरन या जिमीकंद की सब्जी उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में पारंपरिक रूप से बनाई जाती रही है। इसकी खासियत यही है कि यह किसी expensive ingredient पर आधारित नहीं बल्कि जमीन के अंदर उगने वाली एक साधारण कंद वाली सब्जी है। पुराने घरों में इसे मसालों के साथ पकाकर या दूसरी स्थानीय चीजों के साथ मिलाकर बनाया जाता था।
2. केले के तने की सब्जी
केले का तना उन ingredients में है जिसे आज बहुत से लोग खाने के बजाय बेकार हिस्सा मान लेते हैं। लेकिन दक्षिण और पूर्वी भारत की कई food traditions में इसके अंदर के नरम हिस्से को निकालकर सब्जी या दूसरी preparations बनाई जाती हैं। यह उदाहरण बताता है कि पुरानी रसोई में ingredient का लगभग हर उपयोगी हिस्सा बचाने की सोच थी।
3. कमल ककड़ी की सब्जी
तालाबों और जल क्षेत्रों से मिलने वाली कमल ककड़ी उत्तर भारत की कई पा
रंपरिक रसोइयों में इस्तेमाल होती रही है। इसकी कुरकुरी texture इसे दूसरी सब्जियों से अलग बनाती है। आज यह कुछ खास क्षेत्रों में मिलती है, लेकिन रोजमर्रा की urban kitchen में इसका इस्तेमाल काफी सीमित दिखाई देता है।
4. कमल ककड़ी के कोफ्ते
कमल ककड़ी को केवल सब्जी के रूप में ही नहीं बल्कि कोफ्ते जैसी preparations में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह उन recipes का उदाहरण है जिनमें स्थानीय ingredient को अलग तरीके से पकाने की घरेलू creativity दिखाई देती है।
5. कंडाली की सब्जी
उत्तराखंड में कंडाली यानी stinging nettle से बनने वाली सब्जी traditional food knowledge का एक दिलचस्प उदाहरण है। एक अध्ययन में इसे seasonal cuisine के रूप में document किया गया है, जिसमें पौधे की fresh shoots और tender leaves का इस्तेमाल किया जाता था।
6. भट्ट की चुड़कानी
भट्ट उत्तराखंड में इस्तेमाल होने वाली स्थानीय काली सोयाबीन जैसी दाल है। इससे बनने वाली चुड़कानी पहाड़ी रसोई की पहचान रखने वाले व्यंजनों में गिनी जाती है। इसकी कहानी केवल स्वाद की नहीं बल्कि उस खेती की भी है जिसमें स्थानीय pulses ने पहाड़ी भोजन को आधार दिया।
7. फाणू
फाणू उत्तराखंड की उन पारंपरिक दाल आधारित preparations में से है जिनमें स्थानीय pulses को विशेष तरीके से पकाया जाता है। traditional-food research में फाणू को Uttarakhand की documented cuisines में शामिल किया गया है।
8. चैंसू
चैंसू भुनी हुई दाल से तैयार होने वाली उत्तराखंडी preparation है। इसकी खासियत इसकी cooking technique और smoky स्वाद में दिखाई देती है। यह उन व्यंजनों में है जो दिखाते हैं कि पुराने समय में एक ही दाल को अलग-अलग तरीकों से पकाकर भोजन में variety लाई जाती थी।
9. गहत की दाल
गहत यानी horse gram पहाड़ी क्षेत्रों का पुराना pulse ingredient है। इससे दाल, फाणू और दूसरी preparations बनाई जाती रही हैं। Uttarakhand के traditional food documentation में horse gram का विशेष उल्लेख मिलता है।
10. झंगोरे की खीर
झंगोरा यानी barnyard millet से बनी खीर पहाड़ी भोजन की एक अलग पहचान है। यह बताती है कि traditional Indian desserts केवल rice, wheat या refined ingredients पर निर्भर नहीं थे।
11. मंडुए की रोटी
मंडुआ यानी finger millet उत्तराखंड की traditional food culture का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इससे रोटी और दूसरी preparations बनाई जाती रही हैं। आज millets को आधुनिक nutrition discussions में फिर से attention मिल रही है, लेकिन पहाड़ों में इनका उपयोग कोई नया trend नहीं था।
12. काफली
काफली उत्तराखंड की leafy-green based पारंपरिक preparation है। स्थानीय हरी पत्तियों को भोजन का हिस्सा बनाने की यह परंपरा बताती है कि पुरानी रसोई में seasonal greens की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
13. आलू के गुटके
आलू के गुटके उत्तराखंड की सरल लेकिन पहचान वाली preparations में से हैं। कम ingredients में तैयार होने वाला यह भोजन पहाड़ी घरों की practical cooking को समझने का अच्छा उदाहरण है।
14. थिचौणी
थिचौणी में स्थानीय सब्जियों को पीसकर और मसालों के साथ पकाने की पारंपरिक शैली दिखाई देती है। यह ऐसी recipe है जिसे किसी fancy ingredient की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसकी पहचान cooking technique से बनती है।
15. बाड़ी
बाड़ी उत्तराखंड की पारंपरिक दाल आधारित preparation है। इसे स्थानीय अनाज और दालों के साथ खाने की परंपरा रही है और यह पहाड़ी भोजन के उस रूप को दिखाती है जिसमें अनाज और pulses दोनों का संतुलन महत्वपूर्ण था।
16. गुछी की सब्जी
गुछी हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाला एक जंगली mushroom है। इसकी उपलब्धता seasonal होती है और traditional mountain food में wild mushrooms का उपयोग भी document किया गया है।
17. कुट्टू की रोटी
कुट्टू केवल व्रत के भोजन तक सीमित नहीं रहा। पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी खेती और रोटी जैसी preparations भी traditional food system का हिस्सा रही हैं।
18. फापर की रोटी
फापर यानी buckwheat की रोटी ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों की स्थानीय food adaptation को दिखाती है। Uttarakhand के documentation में भी phapar और kuttu जैसी रोटियों का उल्लेख मिलता है।
19. बथुए का साग
सर्दियों में खेतों और आसपास मिलने वाला बथुआ उत्तर भारत की पुरानी seasonal food traditions से जुड़ा है। आज इसे कई लोग केवल “साग” के रूप में जानते हैं, लेकिन पुराने घरों में इससे अलग-अलग recipes तैयार की जाती थीं।
20. बथुए की कढ़ी
बथुए को कढ़ी में मिलाने की परंपरा उत्तर भारतीय घरेलू भोजन का एक अच्छा उदाहरण है। इससे पता चलता है कि seasonal greens को केवल एक तरीके से नहीं बल्कि अलग-अलग preparations में इस्तेमाल किया जाता था।
21. अरबी के पत्तों की सब्जी
अरबी के पत्ते कई भारतीय घरों में traditional cooking का हिस्सा रहे हैं। इनके साथ मसालों और खट्टे ingredients का इस्तेमाल करके अलग-अलग क्षेत्रीय recipes बनाई जाती हैं।
22. अरबी के पत्तों के पकौड़े
अरबी के पत्तों को बेसन और मसालों के साथ पकाकर rolls या पकौड़े जैसी preparations बनाना पश्चिमी और मध्य भारत सहित कई जगहों की घरेलू culinary tradition में मिलता है।
23. कद्दू के फूल की सब्जी
कद्दू के फूल को खाने की परंपरा शायद आज की urban generation के लिए थोड़ी अजीब लगे, लेकिन कई भारतीय क्षेत्रों में फूलों को भी भोजन का हिस्सा बनाया गया है। यही पुरानी रसोई की खासियत थी—जो edible था, उसे केवल उसके “main product” के कारण नजरअंदाज नहीं किया जाता था।
24. कद्दू के फूल के पकौड़े
कद्दू के फूलों को बेसन के घोल में लपेटकर पकाने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में मिलती है। यह एक छोटा सा उदाहरण है कि seasonal ingredients कैसे snack में बदल जाते थे।
25. सहजन के फूल की सब्जी
सहजन की फलियों के बारे में तो लगभग हर भारतीय जानता है, लेकिन इसके फूलों से बनने वाली recipes से बहुत कम लोग परिचित हैं। कई पारंपरिक रसोइयों में फूलों को सब्जी या दूसरी preparations में इस्तेमाल किया गया है।
26. सहजन के पत्तों का साग
सहजन के पत्तों को भी traditional Indian kitchens में पकाया जाता रहा है। यह उन leafy foods में से है जिनका उपयोग आधुनिक kitchen में फलियों की तुलना में बहुत कम दिखाई देता है।
27. महुआ के लड्डू
मध्य भारत और tribal food traditions में महुआ का विशेष स्थान है। इसके फूलों से मिठाइयां और दूसरे स्थानीय foods बनाए जाते रहे हैं। हाल की food-heritage सामग्री भी mahua laddoo को Madhya Pradesh की tribal culinary tradition से जोड़ती है।
28. महुआ का लाटा
महुआ के फूलों से बनने वाला लाटा उन regional preparations में है जिनका नाम पूरे भारत में बहुत कम लोगों ने सुना होगा। यह forest-based food knowledge का उदाहरण है, जहां स्थानीय रूप से उपलब्ध ingredient ने भोजन और संस्कृति दोनों में जगह बनाई।
29. कुल्थी की दाल
कुल्थी या horse gram केवल एक सामान्य pulse नहीं बल्कि कई ग्रामीण और पहाड़ी food traditions का हिस्सा रही है। इससे बनी दाल और दूसरी preparations आज भी कुछ क्षेत्रों में खाई जाती हैं।
30. चना साग
चना उगाने वाले क्षेत्रों में उसके कोमल हरे हिस्से का इस्तेमाल भी भोजन में किया जाता रहा है। यह एक बार फिर दिखाता है कि पारंपरिक रसोई में खेती और भोजन के बीच कितना सीधा संबंध था।
31. सनई के फूल की सब्जी
सनई के फूलों का इस्तेमाल कुछ ग्रामीण food traditions में किया जाता रहा है। ऐसे फूल आधारित व्यंजन आज mainstream Indian food lists में बहुत कम दिखाई देते हैं, इसलिए इन्हें food heritage के नजरिए से document करना जरूरी है।
32. बूंट की दाल
बूंट जैसी स्थानीय दालें खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक protein sources का हिस्सा रही हैं। आधुनिक बाजार में सीमित availability के कारण ऐसी pulses की पहचान कई जगहों पर कम होती जा रही है।
33. कुटकी की खिचड़ी
कुटकी छोटे millets में शामिल है और मध्य भारत सहित कई क्षेत्रों में स्थानीय अनाज के रूप में इस्तेमाल होती रही है। इससे बनने वाली खिचड़ी पुराने अनाज आधारित भोजन की एक झलक देती है।
34. कोदो की खिचड़ी
कोदो millet मध्य भारत की traditional food culture से जुड़ा रहा है। कोदो से खिचड़ी और दूसरी preparations बनाई जाती रही हैं। आज millets पर बढ़ती चर्चा ने इन पुराने अनाजों को फिर से लोगों की नजर में ला दिया है।
35. सामा की खीर
सामा से बनने वाली खीर विशेष अवसरों और व्रत के भोजन से जुड़ी हुई दिखाई देती है। यह traditional Indian dessert की उस विविधता को दिखाती है जो केवल rice-based desserts तक सीमित नहीं थी।
36. चिरौंजी की दाल
मध्य भारत की कुछ पारंपरिक recipes में चिरौंजी का इस्तेमाल केवल मिठाई में नहीं बल्कि savory preparation में भी मिलता है। ऐसी recipes आज सामान्य भारतीय recipe collections में बहुत कम दिखाई देती हैं।
37. बाजरे की खिचड़ी
बाजरा राजस्थान और पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में पुराने समय से भोजन का महत्वपूर्ण अनाज रहा है। इससे बनी खिचड़ी ग्रामीण जीवन की सरल और locally adapted cooking को दर्शाती है।
38. बाजरे की राब
राब या राबड़ी जैसी preparations राजस्थान और पश्चिमी भारत की पुरानी food traditions से जुड़ी हैं। बाजरे और छाछ जैसे स्थानीय ingredients का combination यहां की climate और agricultural conditions के साथ विकसित हुआ।
39. कैर की सब्जी
कैर राजस्थान के शुष्क इलाकों में मिलने वाला स्थानीय फल है। इससे बनने वाली सब्जी दिखाती है कि कम पानी वाले क्षेत्रों की रसोई ने अपने आसपास मिलने वाली वनस्पतियों को भोजन में कैसे शामिल किया।
40. कुमटिया की सब्जी
कुमटिया राजस्थान की पारंपरिक desert-food preparations में इस्तेमाल होने वाली सामग्री है। आज इसके बारे में मुख्यधारा के food conversations में बहुत कम सुनाई देता है।
41. सांगरी की पारंपरिक सब्जी
सांगरी राजस्थान की प्रसिद्ध लेकिन क्षेत्र के बाहर अपेक्षाकृत कम जानी जाने वाली desert food tradition का हिस्सा है। इसे सुखाकर लंबे समय तक रखा जा सकता है और फिर मसालों के साथ पकाया जाता है।
42. गोंदली की सब्जी
गोंदली जैसी स्थानीय ingredients से बनी recipes हमें यह समझने में मदद करती हैं कि भारतीय ग्रामीण भोजन की variety केवल बड़े शहरों में प्रसिद्ध ingredients से कहीं ज्यादा व्यापक थी।
43. बाजरे का ढोकला
बाजरे से बने fermented या steamed preparations गुजरात और राजस्थान के food traditions में अनाज की विविधता को दर्शाते हैं। यह modern wheat-based snacks से बिल्कुल अलग culinary approach है।
44. ओसामण
ओसामण गुजरात की पारंपरिक दाल आधारित preparations में शामिल है। यह उन गुजराती foods में से है जो लोकप्रिय Gujarati food की सामान्य सूची में अक्सर पीछे छूट जाते हैं।
45. मुठिया
मुठिया गुजरात की पारंपरिक steamed preparation है। अलग-अलग ingredients से इसके कई रूप बनाए जाते हैं और यह दिखाती है कि पुराने समय में स्नैक्स हमेशा deep-fried नहीं होते थे।
46. अळूची पातळ भाजी
महाराष्ट्र में अरबी के पत्तों से बनने वाली पतली gravy वाली सब्जी traditional leafy cooking का हिस्सा है। इसका महत्व इस बात में है कि एक सामान्य पत्ते को भी पूरी तरह अलग regional dish में बदला जा सकता है।
47. अळू वड़ी
अरबी के पत्तों को बेसन के मसालेदार मिश्रण के साथ रोल करके पकाने की परंपरा महाराष्ट्र की पहचान वाली preparations में से है। इसकी technique आज भी कुछ घरों में जारी है।
48. झुणका
झुणका बेसन आधारित सरल Maharashtrian preparation है। कम ingredients में तैयार होने वाला यह भोजन ग्रामीण kitchen की practical cooking को सामने लाता है।
49. पिठलं
पिठलं भी बेसन से बनने वाला पारंपरिक महाराष्ट्रीय भोजन है। भाकरी के साथ इसका combination महाराष्ट्र की घरेलू food identity से जुड़ा है।
50. उकडपेंडी
उकडपेंडी महाराष्ट्र की पारंपरिक preparation है जिसमें अनाज के आटे को अलग तरीके से पकाकर savory meal तैयार किया जाता है। यह उन dishes में से है जिनकी पहचान मुख्यतः घरों के भीतर बनी रही।
51. फणसाची भाजी
कटहल यानी jackfruit का इस्तेमाल भारत के कई हिस्सों में सब्जी के रूप में होता रहा है। महाराष्ट्र और Konkan में इसकी अलग-अलग traditional preparations देखने को मिलती हैं।
52. घावन
घावन Konkan और Maharashtra की traditional rice-based preparation है। यह दिखाता है कि fermented या soaked rice batter से भारत के अलग-अलग हिस्सों ने अपनी-अपनी अलग dishes विकसित कीं।
53. सोलकढ़ी
सोलकढ़ी Konkan food culture की पहचान वाली preparation है। नारियल और kokum जैसे स्थानीय ingredients इसका स्वाद अलग बनाते हैं।
54. तांदळाची भाकरी
चावल के आटे से बनी भाकरी महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों की पारंपरिक bread preparation है। गेहूं के बाहर भी भारतीय भोजन में कितने तरह के अनाज और flour इस्तेमाल होते रहे हैं, यह इससे समझा जा सकता है।
55. फोडणीचा भात
बचे हुए चावल को seasoning देकर दोबारा स्वादिष्ट भोजन में बदलने की परंपरा भारतीय घरों में कई रूपों में मिलती है। महाराष्ट्र का फोडणीचा भात इसी सोच का एक regional रूप है।
56. पाखाला भात
ओडिशा का पाखाला भात fermented rice की परंपरा से जुड़ा हुआ है। गर्म मौसम में rice को पानी और fermentation के साथ खाने की यह शैली पूर्वी भारत की अलग food wisdom को सामने लाती है। NCHM की सामग्री में भी Pakhala को Odisha की tribal cuisine के संदर्भ में दर्ज किया गया है।
57. मंडिया जाउ
मंडिया यानी ragi/finger millet से बनने वाला जाउ Odisha की traditional food traditions में document किया गया है। यह स्थानीय millets और regional cooking के संबंध का एक अच्छा उदाहरण है।
58. थापड़ी रोटी
थापड़ी रोटी Odisha की tribal food documentation में दर्ज traditional preparations में से एक है। ऐसी recipes यह दिखाती हैं कि एक ही grain अलग-अलग communities में अलग cooking techniques के साथ इस्तेमाल होता था।
59. एंडी आलू
एंडी आलू Odisha की tribal cuisine से जुड़ी एक comparatively lesser-known preparation है। इसका नाम ही बताता है कि भारत के food heritage में ऐसे कितने dishes हैं जो national food discussions में लगभग गायब हैं।
60. बोड़ी चूरा
बोड़ी से बनने वाला चूरा Odisha की traditional food preparations में दर्ज है। यह preserved या dried ingredients के इस्तेमाल की उस पुरानी सोच को सामने लाता है जिसमें seasonal food को दूसरे रूप में इस्तेमाल किया जाता था।
61. काई चटनी
काई यानी लाल चींटियों से बनने वाली chutney Odisha और कुछ tribal food traditions से जुड़ी एक बेहद अलग preparation है। NCHM की material में इसे Odisha की tribal cuisine में दर्ज किया गया है।
62. जल उतु
Jil Utu Odisha की tribal cuisine की documented preparations में शामिल है। ऐसे dishes mainstream Indian restaurant menus में शायद ही दिखाई देते हैं, जबकि local food heritage के लिए इनका अपना महत्व है।
63. भेदाइलता
Assam में इस्तेमाल होने वाली Bhedailota एक local leafy ingredient है। इससे बनने वाली preparations traditional Assamese food knowledge का हिस्सा हैं और NCHM की tribal cuisine list में भी इसका उल्लेख है।
64. माटिकादुरी
Matikaduri Assam की traditional leafy preparation से जुड़ा नाम है। ऐसे स्थानीय greens बताते हैं कि regional Indian cooking में vegetables की परिभाषा आज के supermarket vegetables से कहीं ज्यादा बड़ी थी।
65. अमिता खार
अमिता खार Assamese cooking की traditional preparation है। इसमें local ingredients और cooking techniques का combination दिखाई देता है, जो Assam की food identity को दूसरे भारतीय क्षेत्रों से अलग बनाता है।
66. खोरिसा भाजी
Khorisa यानी fermented bamboo shoot Assam और Northeast की culinary traditions से जुड़ा ingredient है। Bamboo shoots को fresh, dried और fermented रूपों में इस्तेमाल करने की परंपरा Northeast में लंबे समय से चली आ रही है।
67. पिटिका
पिटिका Assam की सरल mashed preparation है जिसमें स्थानीय ingredients को पीसकर या मसलकर भोजन तैयार किया जाता है। इसकी simplicity ही इसकी खूबसूरती है।
68. मासोर टेंगा
Masor Tenga Assamese cuisine की sour fish preparation है। NCHM की material इसे Assam की tribal cuisine के suggestive dishes में शामिल करती है।
69. बाँस की कोपलों की सब्जी
Bamboo shoots Northeast India की food culture का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अलग-अलग communities इन्हें fresh, dried या fermented रूप में इस्तेमाल करती हैं। एक scholarly review के अनुसार Northeast में bamboo shoots का culinary use सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ा है।
70. सोइबुम
Soibum fermented bamboo shoots से बनने वाली Manipuri food tradition का हिस्सा है। Bamboo shoot को fermentation के माध्यम से preserve करने की technique यह बताती है कि पुराने communities seasonal ingredients को लंबे समय तक उपयोग में लाने के तरीके भी विकसित कर चुकी थीं।
71. सोइजिन एरोम्बा
Soijin-Eromba में partially fermented bamboo shoots को दूसरी local ingredients के साथ इस्तेमाल किया जाता है। यह Northeast की fermentation-based food culture की complexity को समझने का एक अच्छा उदाहरण है।
72. एरोम्बा
Eromba Manipur की traditional preparation है जिसमें vegetables और fermented ingredients का इस्तेमाल किया जाता है। इसका स्वाद और बनाने का तरीका mainstream Indian cuisine से काफी अलग है।
73. सिंग्जू
Singju Manipuri traditional salad या mixed vegetable preparation है। इसमें local vegetables और दूसरी regional ingredients को काटकर मिलाया जाता है।
74. चामथोंग
Chamthong Manipuri vegetable stew जैसी traditional preparation है। इसकी खासियत local seasonal vegetables के उपयोग में है।
75. बाई
Bai Mizoram की traditional food preparation है जिसमें स्थानीय vegetables और दूसरी ingredients का उपयोग होता है। यह Northeast के simple, ingredient-focused cooking style को समझने में मदद करती है।
76. सावछियार
Sawhchiar Mizoram की traditional rice-based preparation है। Rice को अलग-अलग ingredients के साथ पकाने की यह शैली Northeast की कई food traditions में दिखाई देती है।
77. जादोह
Jadoh Meghalaya की प्रसिद्ध traditional rice preparation है। Khasi food culture से जुड़ा यह dish Northeast के rice-based culinary heritage की पहचान है।
78. तुंगरिम्बाई
Tungrymbai Meghalaya की fermented soybean-based traditional preparation है। Fermentation Northeast के कई communities में केवल preservation method नहीं बल्कि food culture का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
79. दोहनीइओंग
Dohneiiong Meghalaya की traditional preparation है जिसमें local ingredients और black sesame जैसे flavours का combination मिलता है। यह Meghalaya की distinctive food identity का उदाहरण है।
80. किनिमा
Kinema fermented soybean से जुड़ी Northeast की traditional food tradition है। Fermentation यहां भोजन को अलग flavor और लंबे समय तक उपयोग की संभावना देने वाली पुरानी technique रही है।
81. कच्चे केले की सब्जी
कच्चे केले से बनने वाली सब्जियां भारत के कई हिस्सों में बनाई जाती रही हैं। लेकिन इसकी regional recipes अलग-अलग हैं और कुछ स्थानीय versions आज mainstream cooking में बहुत कम दिखाई देते हैं।
82. केले के फूल की सब्जी
केले के फूल का इस्तेमाल दक्षिण और पूर्वी भारत की कई traditional kitchens में हुआ है। आज बहुत से लोग केले को केवल फल के रूप में देखते हैं, जबकि पुराने food systems में उसके दूसरे edible हिस्से भी महत्वपूर्ण थे।
83. केले के फूल के पकौड़े
केले के फूल को मसालेदार batter के साथ पकाकर snack बनाया जाता है। यह उन recipes में शामिल है जहां एक agricultural plant के अलग-अलग हिस्से kitchen में अलग-अलग रूप लेते हैं।
84. कमल के बीज की पुरानी खीर
कमल के बीज यानी makhana आज snack और modern health-food market में popular हैं, लेकिन इनके पारंपरिक उपयोग कहीं ज्यादा पुराने हैं। कुछ क्षेत्रों में इन्हें desserts और festive preparations में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
85. बांस की कोपलों की चटनी
Northeast India में bamboo shoots केवल सब्जी नहीं बल्कि chutney, pickle और fermented preparations में भी इस्तेमाल होते हैं। Research literature में कई communities द्वारा bamboo shoots को chutney और fermented foods में उपयोग करने का उल्लेख मिलता है।
86. बांस की कोपलों का अचार
Fermented और preserved bamboo shoots Northeast की food heritage का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कुछ communities इन्हें लंबे समय तक रखने के लिए fermentation और drying का इस्तेमाल करती रही हैं।
87. रागी का पुराना पेय
रागी केवल modern millet flour या dosa का ingredient नहीं है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इससे traditional drinks और porridges भी तैयार किए जाते रहे हैं।
88. ज्वार की भाकरी
ज्वार की भाकरी महाराष्ट्र और Deccan food culture का पुराना हिस्सा है। गेहूं के बढ़ते प्रभुत्व से पहले local grains रोजमर्रा के भोजन में कहीं अधिक महत्वपूर्ण थे।
89. बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी
राजस्थान और पश्चिमी भारत में बाजरे की रोटी का संबंध local agricultural life से रहा है। इसके साथ बनने वाली सरल चटनियां उस भोजन को complete करती थीं।
90. मक्का की रोटी की ग्रामीण परंपराएं
मक्का से बनी रोटियां केवल पंजाब तक सीमित नहीं रहीं। अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में corn flour से अलग आकार और तरीके की breads बनाई जाती रही हैं।
91. कुटकी की रोटी
कुटकी जैसे छोटे millets का इस्तेमाल मध्य भारत और आदिवासी food traditions में अलग-अलग रूपों में होता रहा है। इससे बनी रोटियां आज की mainstream bakery-oriented diet में बहुत कम दिखाई देती हैं।
92. कोदो की रोटी
कोदो millet से बनी रोटी local grain traditions का हिस्सा है। यह बताती है कि Indian food heritage में wheat और rice के अलावा कई दूसरे grains का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
93. कुल्थी का फाणू
Horse gram से केवल साधारण दाल नहीं बल्कि thick और slow-cooked preparations भी बनाई जाती रही हैं। Uttarakhand की documented food tradition में horse gram और fanu जैसी preparations का उल्लेख मिलता है।
94. जंगली मशरूम की सब्जी
हिमालयी क्षेत्रों में seasonal wild mushrooms traditional diets का हिस्सा रहे हैं। Uttarakhand के food documentation में Chyun और Guchhi जैसे wild mushrooms का seasonal consumption दर्ज किया गया है।
95. सरसों के पत्तों से आगे की साग परंपरा
भारत में साग का मतलब केवल सरसों का साग नहीं रहा। बथुआ, चना साग, सहजन के पत्ते, कंडाली और कई स्थानीय greens अलग-अलग क्षेत्रों में seasonal भोजन का हिस्सा रहे हैं।
96. जंगली पत्तियों की पारंपरिक सब्जियां
भारत के कई ग्रामीण और tribal communities ने स्थानीय edible leaves को भोजन में शामिल किया। INTACH का “Foods of India: Sacred and the Ordinary” project भी अलग-अलग राज्यों में ingredients की culinary, ritual और cultural significance को document कर रहा है।
97. fermented rice की अलग-अलग परंपराएं
Pakhala जैसे foods बताते हैं कि fermentation भारत की food culture में कोई आधुनिक trend नहीं है। कई communities ने अनाज को ferment करके अलग स्वाद और texture वाले foods तैयार किए हैं।
98. स्थानीय दालों की पुरानी recipes
आज हमारी grocery list कुछ सीमित pulses तक सिमटती जा रही है, लेकिन पुराने भारतीय food systems में horse gram, black gram और दूसरी local pulses का इस्तेमाल अधिक विविध रूप में होता था। Uttarakhand के documentation में भी local pulses और उनसे बनी कई traditional preparations दर्ज हैं।
99. मौसम के हिसाब से बदलती रसोई
पुरानी भारतीय रसोई की एक बड़ी खूबी यह थी कि हर मौसम में ingredients बदलते थे। गर्मियों में अलग foods, बरसात में उपलब्ध होने वाली चीजें और सर्दियों में मिलने वाले greens—इस seasonal rhythm ने भारत की हजारों recipes को जन्म दिया।
100. दादी-नानी की वह recipe जिसका नाम भी अब याद नहीं
शायद हमारी सबसे बड़ी “भूली हुई dish” वही है जिसका नाम किसी recipe book में नहीं लिखा गया। वह recipe जो दादी ने अपनी मां से सीखी, फिर अपनी बेटी या बहू को बिना किसी लिखित measurement के सिखाई और जो अगली पीढ़ी तक पहुंच ही नहीं पाई।
कई बार ingredients हमें याद रहते हैं लेकिन recipe नहीं। किसी को याद है कि उसकी नानी केले के तने की सब्जी बनाती थीं, किसी को याद है कि घर में महुआ के फूल आते थे, किसी को पहाड़ की कंडाली या गहत याद है और किसी को वह पुराना साग जिसका नाम अब ठीक से याद नहीं।
यही वह जगह है जहां भारतीय food heritage सबसे ज्यादा व्यक्तिगत हो जाता है।
